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Thursday, 19 September 2013

पंक्तियाँ

किताबों की एक बहुत बड़ी खासियत उसमे पाई जाने वाली कई पंक्तियाँ होती हैं जो हमें उन्हें underline करने और उस किताब को याद रखने पर मजबूर कर देती हैं ...

शुरुवात करता हूँ एक लेखक की लेखकों के बारे में लिखी पंक्ति से । 

1.
बनारस (वाराणसी) में चाय की दूकान (अड्डे) पर बैठे हुए 2 लड़कों की लेखक के बारे में बातचीत---
अ)- "ये साहब कौन हैं ?" 
ब)- "लेखक हैं @#$% के (भद्दी गाली)" 
अ)- " काम क्या करते हैं ये ?"
ब)- "कुछ नहीं, जो हम और तुम बात करते हैं वही जाकर लिख देते हैं. "

काशी का अस्सी -- काशीनाथ सिंह

2.
"भगवान् कसम, भगवान् बहुत ख़राब पटकथा (script) लिखता है।"

कसप - मनोहर श्याम जोशी ( हमलोग, बुनियाद, कक्काजी कहिन, मुंगेरी लाल के हसीन सपने , जैसे उम्दा serials के script writer और बेहतरीन साहित्यकार)

3.
शेखर माँ से ," चन्द्र (छोटा भाई ) कहाँ से आया" ?
माँ- "दाई ने लाकर दिया था ".
शेखर दाई से " इतना छोटा भाई क्यों लाई , कुछ और बड़ा लाती "
दाई - " मैं नहीं लाई . वो जो डॉक्टर आया था, वो अपनी बैग में रखकर लाया था।"

शेखर को दोनों पर विश्वास नहीं हुआ। कुछ दिन बाद।

शेखर " माँ- डॉक्टर चिड़ियों के पास भी जाते हैं ?"
माँ-" नहीं तो , क्यों ?"
शेखर- " तब चिड़ियों के बच्चे कहाँ से आते हैं ?"
माँ - " अण्डों में से निकलते हैं ".
शेखर को लगा माँ सच बोल रही हैं। शेखर ने फिर कुछ अधिक आशा से पूछा ,
"और अंडे कहाँ से आते हैं ?"
माँ- " भगवान् भेज देते हैं "
फिर वही दीवार - ज्ञान के पथ में सबसे बड़ी रुकावट - भगवान् ......

शेखर एक जीवनी- अज्ञेय

आप को भी यदि किताबों के बीच ऐसी पंक्तियाँ मिली हों जिन्होंने ने आपके पढने के अनुभव को बेहतरीन बना दिया तो उन्हें यहाँ जरुर share करें

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