राखी के शुभ अवसर पर प्रस्तुत है The Indian Book Depot की तरफ से पहला पोस्ट जिसमे हिंदी साहित्य के कुछ उम्दा उपन्यासों के बारे में जानकारी दी जा रही है जिनके मुख्य पात्र महिलाएं है.
1. चित्रलेखा - ( भगवती चरण वर्मा )
पाप , पुण्य के द्वंध पर प्रकाश डालता हुआ ये उपन्यास अपने मुख्यापात्रों चित्रलेखा (राजनर्तकी), रत्नाम्बर (गुरु ) , और बीजगुप्त के माध्यम से कई विषयों पर सवाल खड़े करता है. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद भी यह उपन्यास आज भी काफी प्रासंगिक है. और सबसे प्रमुख रूप से यह एक बेहतरीन कहानी है।
--> पुस्तक के एक महत्वपूर्ण अध्याय में चाणक्य द्वारा ईश्वर की व्याख्या बहुत रोचक है ।
2. पिंजरे की मैना- ( चन्द्र किरण सोनरेक्सा )
आजादी पूर्व की हिंदी की एक प्रमुख लेखिका (जिनकी कहानियां धर्मयुग , साप्ताहिक हिंदुस्तान में छपती थीं ) जिनका विवाह (लव कम अरेंज्ड) एक प्रसिद्द फोटोग्राफर से हुआ विवाह के पश्चात पति के द्वारा दी गयी प्रतारणा और तिरस्कार से किसी प्रकार छुटकारा पाकर एक आत्मकथात्मक उपन्यास लिखती हैं और वह उपन्यास उनकी सबसे बेहतरीन रचना बन जाती है. पुस्तक का नाम है पिंजरे की मैना ।
3. न हन्यते - ( मैत्रेयि देवी )
घर में आये एक विदेशी मेहमान से प्रेम हो जाना, और कई साल बाद अपने उसी प्रेम प्रसंग पर आधारित एक उपन्यास पढना जो उसी मेहमान ने लिखा था पर उसमे सच का बहुत कम अंश पाना , किसी को भी काफी दुखी कर सकता है. पर हिम्मत बांध कर उस का जवाब लिखना जो एक बहुचर्चित रचना बन जाए एक साहसी लेखिका का परिचय है.
4 . निर्मला - ( प्रेमचंद )
यह उपन्यास आजादी से पूर्व के समाज की कई बुराइयों (जो आज भी प्रचलित हैं) पर प्रकाश डालता है और उन रीती रिवाजों की वजह से औरतों की जिंदगियों पर होते हुए दुष्प्रभाव को बहुत ही प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करता है .
1. चित्रलेखा - ( भगवती चरण वर्मा )
पाप , पुण्य के द्वंध पर प्रकाश डालता हुआ ये उपन्यास अपने मुख्यापात्रों चित्रलेखा (राजनर्तकी), रत्नाम्बर (गुरु ) , और बीजगुप्त के माध्यम से कई विषयों पर सवाल खड़े करता है. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद भी यह उपन्यास आज भी काफी प्रासंगिक है. और सबसे प्रमुख रूप से यह एक बेहतरीन कहानी है।
--> पुस्तक के एक महत्वपूर्ण अध्याय में चाणक्य द्वारा ईश्वर की व्याख्या बहुत रोचक है ।
2. पिंजरे की मैना- ( चन्द्र किरण सोनरेक्सा )
आजादी पूर्व की हिंदी की एक प्रमुख लेखिका (जिनकी कहानियां धर्मयुग , साप्ताहिक हिंदुस्तान में छपती थीं ) जिनका विवाह (लव कम अरेंज्ड) एक प्रसिद्द फोटोग्राफर से हुआ विवाह के पश्चात पति के द्वारा दी गयी प्रतारणा और तिरस्कार से किसी प्रकार छुटकारा पाकर एक आत्मकथात्मक उपन्यास लिखती हैं और वह उपन्यास उनकी सबसे बेहतरीन रचना बन जाती है. पुस्तक का नाम है पिंजरे की मैना ।
3. न हन्यते - ( मैत्रेयि देवी )
घर में आये एक विदेशी मेहमान से प्रेम हो जाना, और कई साल बाद अपने उसी प्रेम प्रसंग पर आधारित एक उपन्यास पढना जो उसी मेहमान ने लिखा था पर उसमे सच का बहुत कम अंश पाना , किसी को भी काफी दुखी कर सकता है. पर हिम्मत बांध कर उस का जवाब लिखना जो एक बहुचर्चित रचना बन जाए एक साहसी लेखिका का परिचय है.
4 . निर्मला - ( प्रेमचंद )
यह उपन्यास आजादी से पूर्व के समाज की कई बुराइयों (जो आज भी प्रचलित हैं) पर प्रकाश डालता है और उन रीती रिवाजों की वजह से औरतों की जिंदगियों पर होते हुए दुष्प्रभाव को बहुत ही प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करता है .
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