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Saturday, 7 March 2015

आपका बंटी (मन्नू भंडारी)

आपका बंटी
मन्नू भंडारी

“ एक कमरे में सारा सामान अस्त व्यस्त ढंग से पड़ा है- बंटी के घर का सामान ! बक्से-बिस्तरे, गठरी में बंधी हुई किताबें... टोकरी में भरे हुए बंटी के खिलौने ... बंटी की पेंटिंग्स... और भी जाने क्या-क्या ! लगा जैसे उसका सारा घर गठरियों, टोकरियों में बांधकर यहाँ ठूंस दिया गया है. मम्मी एक बक्से में से कपड़े निकाल रही हैं और बंटी उस सामान को देख रहा है. सामान का भी चेहरा होता है क्या ? सारा सामान कैसा उदास-उदास लग रहा है . “

बंटी के पिता (अजय) और उसकी मम्मी में सम्बन्ध विच्छेद हो गया है और तलाक की औपचारिकता अपनी प्रक्रियाओं से गुज़र रही है.
और साथ में बंटी और उसकी मम्मी की ज़िन्दगी भी गुज़र रही है.
मम्मी का एक नाम तो है (शकुन) पर वो इंसान इस कहानी में, शकुन की ज़िन्दगी और मम्मी की ज़िन्दगी के बीच झूल रही हैं.
कभी मम्मी का व्यक्तित्व और सोच शकुन पर हावी हो जाते हैं कभी शकुन पर मम्मी का व्यक्तित्व और सोच हावी हो जाता है.
इस द्वंध को बंटी देख रहा है, उसके नतीजे भुगत रहा है और अपनी अक्ल के हिसाब से समझने की कोशिश भी कर रहा है.
“पर बंटी को ये नहीं समझ आता कि क्यों वो जब किसी से अपने पापा की बात करना चाहता है तो पूरा माहौल उदास हो जाता है, और उसे ये एहसास होता कि उसने शायद कोई गलती कर दी है . आखिर वो अपने पापा की बात आराम से किससे करे ?”
और जब क्लास में रामायण और महाभारत कि लड़ाइयों की कहानी वो समझ सकता है तो क्यों उसे नासमझ समझकर अपने मम्मी पापा कि लड़ाई की बात नहीं समझाई जाती ?
और जब चाचा ने उसकी बनाई हुई पेंटिंग्स देखकर पूछा
“ये चित्र तुमने बनाए हैं ?
‘हां’ बड़े गर्व से बंटी ने कहा “स्कूल में मेरी और भी अच्छी-अच्छी पेंटिंग्स रखी हैं. आर्ट क्लब का चीफ हूँ...”
“अच्छा” चाचा ने शाबाशी देते हुए उसकी पीठ थपथपाई और फिर जैसे कहीं से उदास हो गए.
पर यह भी कोई उदास होने कि बात हुई भला !”
इस उपन्यास को शकुन और बंटी के अंतर्मन की बातें, पाठक के बिलकुल करीब लेकर जाती हैं.
पात्रों की परिस्थितियां भले ही पाठकों की जिंदगी से अलग हों पर जो द्वंद्ध शकुन के मन में है, अपने रिश्तों को और खुद को लेकर, जिस दुविधा में वो है, वो अंतर्द्वंध और दुविधा हम सब की जिंदगी का एक अभिन्न अंग है.
बंटी के मन की बातें बताती हैं कि बच्चों के सवाल, उनकी बातें अक्सर बेवजह नहीं होती. कुछ वजह जरुर होती है और उस वजह को जानने कि कोशिश करना जरुरी है. बंटी के मन की बातें पाठकों को अपने बच्चों के करीब ले जाने में, उन्हें समझने में मदद  करती हैं.(मन्नू जी को लिखे गए पाठकों के कई पत्र इस बात की पुष्टि करते हैं )  
एक अच्छी कहानी एक महान उपन्यास तब कहलाती है जब वो कहानी, आपकी जिंदगी को बेहतर बनाने का एक माध्यम साबित हो, उस कहानी के माध्यम से कई ऐसी बातें समझ में आयें जो आजतक समझ में न आई हों या जब उसे पढ़कर पाठक खुद अपनी जिंदगी को बदलने के लिए प्रयास करे.
“आपका बंटी” एक ऐसी ही कहानी है.

Thursday, 19 September 2013

पंक्तियाँ

किताबों की एक बहुत बड़ी खासियत उसमे पाई जाने वाली कई पंक्तियाँ होती हैं जो हमें उन्हें underline करने और उस किताब को याद रखने पर मजबूर कर देती हैं ...

शुरुवात करता हूँ एक लेखक की लेखकों के बारे में लिखी पंक्ति से । 

1.
बनारस (वाराणसी) में चाय की दूकान (अड्डे) पर बैठे हुए 2 लड़कों की लेखक के बारे में बातचीत---
अ)- "ये साहब कौन हैं ?" 
ब)- "लेखक हैं @#$% के (भद्दी गाली)" 
अ)- " काम क्या करते हैं ये ?"
ब)- "कुछ नहीं, जो हम और तुम बात करते हैं वही जाकर लिख देते हैं. "

काशी का अस्सी -- काशीनाथ सिंह

2.
"भगवान् कसम, भगवान् बहुत ख़राब पटकथा (script) लिखता है।"

कसप - मनोहर श्याम जोशी ( हमलोग, बुनियाद, कक्काजी कहिन, मुंगेरी लाल के हसीन सपने , जैसे उम्दा serials के script writer और बेहतरीन साहित्यकार)

3.
शेखर माँ से ," चन्द्र (छोटा भाई ) कहाँ से आया" ?
माँ- "दाई ने लाकर दिया था ".
शेखर दाई से " इतना छोटा भाई क्यों लाई , कुछ और बड़ा लाती "
दाई - " मैं नहीं लाई . वो जो डॉक्टर आया था, वो अपनी बैग में रखकर लाया था।"

शेखर को दोनों पर विश्वास नहीं हुआ। कुछ दिन बाद।

शेखर " माँ- डॉक्टर चिड़ियों के पास भी जाते हैं ?"
माँ-" नहीं तो , क्यों ?"
शेखर- " तब चिड़ियों के बच्चे कहाँ से आते हैं ?"
माँ - " अण्डों में से निकलते हैं ".
शेखर को लगा माँ सच बोल रही हैं। शेखर ने फिर कुछ अधिक आशा से पूछा ,
"और अंडे कहाँ से आते हैं ?"
माँ- " भगवान् भेज देते हैं "
फिर वही दीवार - ज्ञान के पथ में सबसे बड़ी रुकावट - भगवान् ......

शेखर एक जीवनी- अज्ञेय

आप को भी यदि किताबों के बीच ऐसी पंक्तियाँ मिली हों जिन्होंने ने आपके पढने के अनुभव को बेहतरीन बना दिया तो उन्हें यहाँ जरुर share करें

One Liners

Among many things that make a book a great experience are the one-liners and conversations.
I would like to share some of my favorite lines from few books.

To start, here is a sentence about writers, by a writer.

1.
A conversation of 2 young boys in Banaras City at a road side tea shop, about The Writer.

A- “Who is he ?“
B- “He is a writer, @#$% ke (cuss words)”
A- “What does he do?”
B- “Nothing much, whatever we talk, he just writes it...”

Kashi ka Assi- Kashinath Singh

2.
“I swear to god, God is a Pathetic Script Writer”

Kasap- Manohar Shyam Joshi (He is a great author and script writer of Television serials like, Hamlog, Buniyaad, Kakkaji Kahin, Mungeri Lal ke Haseen Sapne and many others....)

3.
Shekhar to mother- “ Maa- From where did Chandra (younger brother) came?
Maa- “The maid brought him to us”
Shekhar to Maid – “Why did u bring such small brother? Should have brought somewhat bigger”
Maid- “I didn’t bring him, the doctor brought him in his bag”

Shekhar realised both were telling lies.
After few days.

Shekhar to Mother – “Do doctors also go to the birds?”
Mother- “No, why do u ask?“
Shekhar- “Then where do birds get their children from?”
Mother- “From Eggs”
Shekhar felt now she was telling some truth. He asked with a bit of hope.
Shekhar- “And where do eggs come from ?”
Mother- “GOD sends them”

Again the same obstruction. In the path of knowledge the biggest obstruction is GOD...

Shekhar–A Life --- Agyeya

If you have also stumbled upon such gem of one liners and conversations in books, do share here...

Tuesday, 27 August 2013

Hindi Novels : Love Based

Novels in Hindi Literature which are based on Love and its many aspects. (Romantic in parts)

1. GUNAAHON KA DEVTA- (DHARMVEER BHARTI)This novel is one of the bestsellers in Hindi Literature rather The Bestseller.The characters in the nov
el keep their emotions to themselves but they reach somewhere deep to the readers in a very subtle way. I won’t be giving any introduction to the story because then it would sound like a regular Love Story and will kill the charm of the novel. Reading this novel is an experience in itself and experiences cannot be described. Go for it.

2. TUMHARE LIYE - (HIMANSHU JOSHI)
To say that this novel has the power to touch your heart is an understatement. What happens when a young man who has to fulfil many family responsibilities falls in love is one aspect to which the novel caters.
The novel is not only based in city of Nainital but takes it as a character and this character will make you plan, a visit to it.
A word of caution. Its hard to put the novel down.

3. EK INCH MUSKAAN – ( RAJENDRA YADAV & MANNU BHANDARI)
This novel has been written by two stalwarts of Hindi Literature who are husband and wife in real life.
The novel is less of an experiment but more of a good read. Both Rajendra Yadav and Mannu Bhandari used to write a chapter and used to leave the next chapter for the other to complete.
I always wonder about the topic which excited both writers enough to come together and put their thoughts and mind to it.
BTW Mannu Bhandari has an awesome story on love “YAHI SACH HAI” to her credit. Must Read.

4. Machhuware – ( TAKSHI SHIVSHANKAR PILLAI )
Awarded with Sahitya Academy this novel is based on lives of fishermen of Keral but is woven by threads of love as premise.
A reader will quite likey well notice the Simplicity of Love in Lower Strata of society.
The novel is originally in Malyalam (Chemmin- original name) but the Hindi adaptation has been very well received.


१- " सच सच कहो, क्या तुम मुझसे प्रेम करती हो" ?
२- " हाँ, मैं आपसे बेहद प्रेम करती हूँ , कम से कम इस समय तो "
१- " कम से कम इस समय, मैं इसका मतलब नहीं समझा "
२- " कैसे समझाऊं, हमारी ज़िन्दगी में तरह तरह की भावनाएं हैं, प्रेम , घृणा , क्रोध , शांति। कभी एक भावना आती है और कभी दूसरी। इस समय मेरे अन्दर प्रेम की भावना है। मुझे इस जगह से प्यार है, मुझे इस शहर से प्यार है, मुझे इस दृश्य से प्यार है , मुझे आपसे प्यार है , सच कहती हूँ मुझे जिंदगी से प्यार है ."
१- लेकिन आज सोच रहा हूँ उसने जो जवाब दिया था उसमे कहीं कुछ रहस्य था। उसने मुझसे झूठ नहीं कहा था, शायद एक बहुत बड़ा सत्य कहा था जिसे मैं उस समय अनुभव नहीं कर सका था।

The conversation above, for the first time made me realize and understand about the different aspects of love. Earlier Romance and Love were same for me. But that’s where Literature comes in. To make us understand things before we encounter them in Real Life.

2. TUMHARE LIYE - (HIMANSHU JOSHI)To say that this novel has the power to touch your heart is an understatement. What happens when a young man who has to fulfil many family responsibilities falls in love is one aspect to which the novel caters. The novel is not only based in city of Nainital but takes it as a character and this character will make you plan, a visit to it. A word of caution. Its hard to put the novel down.
3. EK INCH MUSKAAN – ( RAJENDRA YADAV & MANNU BHANDARI)This novel has been written by two stalwarts of Hindi Literature who are husband and wife in real life. The novel is less of an experiment but more of a good read. Both Rajendra Yadav and Mannu Bhandari used to write a chapter and used to leave the next chapter for the other to complete. I always wonder about the topic which excited both writers enough to come together and put their thoughts and mind to it.BTW Mannu Bhandari has an awesome story on love “YAHI SACH HAI” to her credit. Must Read.
4. Machhuware – ( TAKSHI SHIVSHANKAR PILLAI )Awarded with Sahitya Academy this novel is based on lives of fishermen of Keral but is woven by threads of love as premise.A reader will quite likey well notice the Simplicity of Love in Lower Strata of society.The novel is originally in Malyalam (Chemmin- original name) but the Hindi adaptation has been very well received. 

१- " सच सच कहो, क्या तुम मुझसे प्रेम करती हो" ?२- " हाँ, मैं आपसे बेहद प्रेम करती हूँ , कम से कम इस समय तो "१- " कम से कम इस समय, मैं इसका मतलब नहीं समझा "२- " कैसे समझाऊं, हमारी ज़िन्दगी में तरह तरह की भावनाएं हैं, प्रेम , घृणा , क्रोध , शांति। कभी एक भावना आती है और कभी दूसरी। इस समय मेरे अन्दर प्रेम की भावना है। मुझे इस जगह से प्यार है, मुझे इस शहर से प्यार है, मुझे इस दृश्य से प्यार है , मुझे आपसे प्यार है , सच कहती हूँ मुझे जिंदगी से प्यार है ."१- लेकिन आज सोच रहा हूँ उसने जो जवाब दिया था उसमे कहीं कुछ रहस्य था। उसने मुझसे झूठ नहीं कहा था, शायद एक बहुत बड़ा सत्य कहा था जिसे मैं उस समय अनुभव नहीं कर सका था।
The conversation above, for the first time made me realize and understand about the different aspects of love. Earlier Romance and Love were same for me. But that’s where Literature comes in. To make us understand things before we encounter them in Real Life.

प्रेम पर आधारित उपन्यास



१- "  सच सच कहो, क्या तुम मुझसे प्रेम करती हो"    ?
२- "  हाँ, मैं आपसे बेहद प्रेम करती हूँ , कम से कम इस समय तो "
१- "  कम से कम इस समय, मैं इसका मतलब नहीं समझा "
२- "  कैसे समझाऊं, हमारी ज़िन्दगी में तरह तरह की भावनाएं हैं, प्रेम , घृणा , क्रोध , शांति। कभी एक भावना आती है और कभी दूसरी।  इस समय मेरे अन्दर प्रेम की भावना है। मुझे इस जगह से प्यार है, मुझे इस शहर से प्यार है, मुझे इस दृश्य से प्यार है , मुझे आपसे प्यार है , सच कहती हूँ मुझे जिंदगी से प्यार है ."
१- लेकिन आज सोच रहा हूँ उसने जो जवाब दिया था उसमे कहीं कुछ रहस्य था। उसने मुझसे झूठ नहीं कहा था, शायद एक बहुत बड़ा सत्य कहा था जिसे मैं उस समय अनुभव  नहीं कर सका था।

इन पंक्तियों को पढ़कर मुझे जिंदगी  में पहली  बार प्रेम और उसके अन्य  पक्ष को जानने का मौका मिला।
ऐसे ही अनुभवों के लिए शायद हम किताबें पढ़ते हैं .
इस बार प्रयास है की प्रेम पर आधारित कुछ  उपन्यासों की जानकारी आप तक पहुंचाई जाये .
(इन उपन्यासों की कहानी का कोई परिचय नहीं दिया जा रहा, इस से इनकी रोचकता को क्षती पहुच रही थी )


1. गुनाहों का देवता - ( धर्मवीर भारती )
 कहा जाता है कि ये हिंदी साहित्य का  सर्वाधिक बिकने वाला उपन्यास है।
इस उपन्यास की सबसे खूबसूरत बात ये है कि पात्र अपनी भावनाओं को खुद तक रखते हैं, उन्हें सामने नहीं आने देते पर  पढने  वाले तक सारी भावनाएं, पात्रों के विचार,  सब कुछ बहुत ही सरलता से पहुँचता रहता है.
यहाँ कहानी का जरा सा भी परिचय देना उचित नहीं . इस उपन्यास को पढना एक अनुभव है , और अनुभव का कोई परिचय नहीं दिया जा सकता। जरुर पढ़ें।


2. तुम्हारे लिए - ( हिमांशु जोशी )
 इस उपन्यास के बारे में बताने के लिए  "दिल को छू लिया " मुहावरे का इस्तेमाल करना काफी छोटा साबित होगा। क्या होता है जब एक युवक जिसके कन्धों पर जिम्मेदारियां हैं उसे प्रेम हो जाता है।  नैनीताल इस उपन्यास के लिए एक शहर ही नहीं बल्कि एक पात्र है जो आपको अपनी  ओर जरुर खींचेगा। एक बार किताब शुरू करने के बाद आप इसे वापस नहीं रख पाएँगे।

3. एक इंच मुस्कान -  (राजेन्द्र  यादव  & मन्नू भंडारी )
इस उपन्यास की हिंदी के दो बेहतरीन लेखकों ने लिखा जो असल जिंदगी में पति पत्नी भी हैं। इसे एक प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया जिसके अध्याय दोनों लेखकों द्वारा एक के बाद एक लिखे गए और उसका नतीजा बहुत ही बेहतरीन निकला। दो अच्छे लेखकों के विचार और मस्तिष्क जब एक ही विषय के हो गए तब  जन्मी  एक इंच मुस्कान ।

4. मछुआरे (चेम्मिन ) - ( तकषी शिवशंकर पिल्लै)
साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित ये उपन्यास केरल के मछुवारों की जिंदगी पर आधारित है पर प्रेम वो तागा है जिस से इस उपन्यास का जाल बुना गया है. समाज के एक अलग ही हिस्से की प्रेमकथा है मछुवारे .असल उपन्यास मलयालम का है पर इसका हिंदी अनुवाद बहुत ही ज्यादा चर्चित  हुआ।

इस कड़ी में एक कहानी जरुर पढ़ें " यही सच है ( मन्नू भंडारी ) "

आप लोगों को भी जो उपन्यास कहानियां इत्यादि पसंद आयें हों उनके  बारे में जरूर बतायें। हमें ख़ुशी होगी।


Thursday, 22 August 2013

बाबुल तुम बगिया के तरुवर (गोपाल सिंह नेपाली)


बाबुल तुम बगिया के तरुवर
गोपाल सिंह नेपाली

बाबुल तुम बगिया के तरुवर, हम तरुवर की चिड़िया रे
दाना चुगते उड़ जाएँ हम, पिया मिलन की घड़ियाँ रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लडियां रे
बाबुल तुम बगिया के तरुवर ....


आँखों से आँसू  निकले तो पीछे तके नहीं मुड़के
घर की कन्या वन का पंछी, फिर न डाली से उड़के
बाजी हारी हुई त्रिया की
जनम- जनम सौगात पिया की
 बाबुल तुम गूंगे नैना, हम आँसू की फुलझड़ीयाँ  रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे


हमको सुध न जनम के पहले, अपनी कहाँ अटारी थी
आँख खुली तो नभ के नीचे, हम थे गोद तुम्हारी थी
ऐसा था वह रैन बसेरा, 
जहाँ साँझ भी लगे सवेरा
बाबुल तुम गिरिराज हिमालय, हम झरनों की कड़ियाँ रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे

छितराए नौ लाख सितारे , तेरी नभ की छाया में
मंदिर-मूरत, तीरथ देखे, हमने तेरी काया में
दुःख में भी हमने सुख देखा
तुमने बस कन्या मुख देखा
बाबुल तुम कुलवंश कमल हो, हम कोमल पंखुड़ियां रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे


बचपन के भोलेपन पर जब, छिटके रंग जवानी के
प्यास प्रीती की जागी तो हम, मीन बने बिन पानी के
जनम-जनम के प्यारे नैना
चाहें नहीं कुंवारे रहना
बाबुल ढूंढ  फिरो तुम हमको, हम ढूंढें बाँवरिया रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे


चढ़ती उम्र बढ़ी तो कुल, मर्यादा से जा टकराई
पगड़ी गिरने के डर से, दुनिया जा डोली ले आई
मन रोया, गूंजी शहनाई
नयन बहें, चुनरी पहनाई
पहनाई चूड़ी सुहाग की, या डाली हथकड़ियां रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे


मंत्र पढ़े सौ सदी पुराने, रीत निभाई प्रीत नहीं
तन का सौदा करके भी तो, पाया मन का मीत नहीं
गात, फूल सा कांटे पग में
जग के लिए हम जग में
बाबुल तुम पगड़ी समाज के, हम पथ की कंकड़ीयां  रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे


मांग रची आंसूं के ऊपर, घूँघट गीली आंखों पर
ब्याह नाम से, यह लीला, जाहिर करवाई लाखों पर
जो घूँघट से डर-डर झांके
वरा उसे बाजे बजवा के
गुड़िया  खेल बढे हम, फिर भी दुनिया समझे गुड़िया रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे


नेह लगा तो नैहर छूटा, पिया मिले बिछुड़ी  सखियाँ
प्यार बताकर पीर मिली तो नीर बनी फूटी  अंखियाँ
हुई चलाकर चाल पुरानी
नई  जवानी पानी-पानी
चली मनाने चिर वसंत में, ज्यों सावन की झड़ियां रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे


देखा जो ससुराल पहुंचकर, तो दुनिया ही न्यारी थी
फूलों का था देश हरा, पर काँटों की फुलवारी थी
कहने को  सारे अपने थे
पर दिन दोपहर के सपने थे
मिली नाम पर कोमलता के, केवल नरम कंकड़ीयां रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे


वेद-शास्त्र थे लिखे पुरुष के, मुश्किल था बचकर जाना
हारा दांव बचा लेने को, पति को परमेश्वर जाना
दुल्हन बनकर दिया जलाया
दासी बनकर घर बार चलाया
माँ बनकर ममता बांटी तो, महल बनी झोपड़ियाँ रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे


मन की सेज सुला प्रियतम को, दीप नयन का मन्द किया
छुड़ा जगत से अपने को, सिंदूर बिंदु में बंद किया
जंजीरों से बाँधा  तन को 
त्याग-राग से साधा मन को
पंछी के उड़ जाने पर ही, खोली नयन किवाड़ीयां रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे


जनम लिया  तो जले पिता-माँ, यौवन खिला ननद-भाभी
ब्याह रच तो जला मोहल्ला, पुत्र हुआ तो बन्ध्य भी
जले ह्रदय के अन्दर नारी
उस पर बाहर दुनिया सारी
मर जाने पर भी मरघट में, जल-जल उठी लकड़ियाँ रे
उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे


जनम-जनम जग के नखरे पर, सज-धज कर जाएँ वारी
फिर भी समझ गए रात दिन हम ताड़न के अधिकारी
पहले गए पिया जो हम से
अधम बने हम यहाँ अधम से
पहले ही हम चल बसें, तो जग बांटे रेवड़ियाँ रे

उड़ जाएँ तो लौट ना आयें, ज्यों मोती की लड़ियाँ   रे

Wednesday, 21 August 2013

Books With Women Protagonists

राखी के शुभ अवसर पर प्रस्तुत है The Indian Book  Depot की तरफ से पहला पोस्ट जिसमे  हिंदी साहित्य के कुछ उम्दा उपन्यासों के बारे में जानकारी दी जा रही है जिनके मुख्य पात्र महिलाएं है.

1. चित्रलेखा - ( भगवती चरण वर्मा )
पाप , पुण्य के द्वंध पर प्रकाश डालता हुआ ये उपन्यास अपने मुख्यापात्रों  चित्रलेखा (राजनर्तकी), रत्नाम्बर (गुरु ) , और बीजगुप्त  के माध्यम से कई विषयों पर सवाल खड़े करता है. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद भी यह उपन्यास आज भी काफी प्रासंगिक है. और सबसे प्रमुख रूप से यह एक बेहतरीन कहानी है।
--> पुस्तक के एक महत्वपूर्ण अध्याय में चाणक्य द्वारा ईश्वर की व्याख्या  बहुत रोचक है ।

2. पिंजरे की मैना- ( चन्द्र किरण सोनरेक्सा )
आजादी पूर्व की हिंदी की एक प्रमुख लेखिका (जिनकी कहानियां धर्मयुग , साप्ताहिक हिंदुस्तान में छपती थीं ) जिनका विवाह (लव कम  अरेंज्ड) एक प्रसिद्द फोटोग्राफर से हुआ विवाह के पश्चात पति के द्वारा दी गयी प्रतारणा और तिरस्कार से किसी प्रकार छुटकारा पाकर एक  आत्मकथात्मक उपन्यास लिखती हैं और वह उपन्यास उनकी सबसे बेहतरीन रचना बन जाती है. पुस्तक का नाम है   पिंजरे की मैना ।

3. न हन्यते - ( मैत्रेयि देवी )
घर में आये एक विदेशी मेहमान से प्रेम हो जाना, और कई साल बाद अपने उसी प्रेम प्रसंग पर आधारित एक उपन्यास पढना जो उसी मेहमान ने लिखा था पर उसमे सच का बहुत कम  अंश पाना , किसी को भी काफी दुखी कर सकता है. पर हिम्मत बांध कर उस का जवाब लिखना जो एक बहुचर्चित रचना बन जाए एक साहसी लेखिका का परिचय है.

4 . निर्मला - ( प्रेमचंद )
यह उपन्यास आजादी से पूर्व के समाज की कई बुराइयों (जो आज भी प्रचलित हैं) पर प्रकाश डालता है और उन रीती रिवाजों की वजह से औरतों की जिंदगियों पर होते हुए दुष्प्रभाव को बहुत ही प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करता है .

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